विश्व थैलेसीमिया दिवस पर DDU अस्पताल में भावुक माहौल, बच्चों ने शेयर किए प्रेरणादायक अनुभव
- DDU अस्पताल बना थैलेसीमिया बच्चों के लिए उम्मीद की मिसाल, डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को मिला सम्मान
- सेवा, समर्पण और संवेदनशीलता की मिसाल बना DDU अस्पताल, बच्चों ने कहा — “यह हमारा दूसरा घर”
- DDU अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की मेहनत को मिला सलाम, थैलेसीमिया बच्चों ने सुनाई अपनी कहानी
- थैलेसीमिया बच्चों की मुस्कान बना DDU अस्पताल, कार्यक्रम में गूंजा डॉक्टरों और नर्सों का सम्मान
- DDU अस्पताल में विश्व थैलेसीमिया दिवस पर भावुक पल, बच्चों ने कहा — “हमारी जिंदगी के असली हीरो”
नई दिल्ली- हनी महाजन प्रथम एजेंडा
दीन दयाल उपाध्याय हॉस्पिटल में विश्व थैलेसीमिया दिवस के अवसर पर एक भव्य, भावनात्मक और प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में थैलेसीमिया से जूझ रहे बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और मंच से अपने अनुभव साझा करते हुए अस्पताल के डॉक्टरों, नर्सिंग अधिकारियों और स्वास्थ्यकर्मियों के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया। बच्चों ने कहा कि “डीडीयू अस्पताल हमारे लिए सिर्फ एक अस्पताल नहीं, बल्कि दूसरा घर है। यहां हमें इलाज के साथ प्यार, अपनापन और जीवन जीने का हौसला मिलता है।”
कार्यक्रम का माहौल उस समय भावुक हो गया जब कई बच्चों ने बताया कि कैसे अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की मेहनत और देखभाल की वजह से आज वे सामान्य जीवन जी पा रहे हैं। बच्चों ने कहा कि समय पर इलाज, नियमित ब्लड ट्रांसफ्यूजन और डॉक्टरों की लगातार निगरानी ने उन्हें नई जिंदगी दी है।
इस अवसर पर अस्पताल परिसर को विशेष रूप से सजाया गया था। कार्यक्रम में मौजूद अतिथियों ने थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के साहस और उनके परिवारों के संघर्ष को सलाम किया। वक्ताओं ने कहा कि डीडीयू अस्पताल वर्षों से थैलेसीमिया बच्चों की सेवा में समर्पित भाव से कार्य कर रहा है और यहां आने वाले बच्चों को हर संभव चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। कार्यक्रम में डॉ. मृगेन्द्र दास,
डॉ. योगेन्द्र मौर्य , डॉ. रितु चावला , डॉ. रिपु दमन, डॉ. जे. एस. अरोड़ा, निर्मल भदौरिया ,रेणु मॉल सहित कई वरिष्ठ डॉक्टर, नर्सिंग अधिकारी और स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे।
मुख्य अतिथियों ने अपने संबोधन में कहा कि थैलेसीमिया जैसी बीमारी से डरने की नहीं बल्कि जागरूकता और सही उपचार के जरिए लड़ने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यदि समय पर जांच और इलाज हो तो थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे भी सामान्य बच्चों की तरह जीवन जी सकते हैं। साथ ही उन्होंने लोगों से रक्तदान के लिए आगे आने की अपील की और कहा कि रक्तदान कई बच्चों की जिंदगी बचाने का माध्यम बन सकता है।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों को सम्मानित कर उन्हें मोटिवेट किया गया। डॉक्टरों और नर्सिंग अधिकारियों द्वारा बच्चों को उपहार वितरित किए गए, जिससे बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और बच्चों की मुस्कान ने पूरे कार्यक्रम को यादगार बना दिया।
वहीं बच्चों के माता-पिता ने भी डीडीयू अस्पताल और वहां के स्टाफ की जमकर सराहना की। कई अभिभावकों ने भावुक होकर कहा कि अस्पताल के डॉक्टर और नर्सें उनके बच्चों के लिए भगवान समान हैं, जो दिन-रात उनकी सेवा में लगे रहते हैं। उन्होंने कहा कि यहां केवल इलाज ही नहीं बल्कि मानसिक सहयोग और परिवार जैसा वातावरण भी मिलता है।
कार्यक्रम में मौजूद हमारे संवाददाता हनी महाजन से बातचीत करते हुए अतिथियों ने कहा कि समाज में थैलेसीमिया को लेकर जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि विवाह से पहले जांच और समय रहते सही जानकारी से इस बीमारी को काफी हद तक रोका जा सकता है। साथ ही उन्होंने बच्चों और उनके अभिभावकों को हमेशा सकारात्मक रहने और नियमित उपचार जारी रखने की सलाह दी।
विश्व थैलेसीमिया दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम न केवल बच्चों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना, बल्कि समाज को यह संदेश भी दे गया कि सही इलाज, जागरूकता और मानवता के भाव से हर कठिन बीमारी के खिलाफ जंग जीती जा सकती है।
Pratham ajenda ka Thank you
Best doctor D.D.U
Best doctor ddu
Thanks to all the doctors and staff of D.D.U hospital. All doctors and nurses are very polite for each and every children.