बौद्ध सर्किट बनेगा उत्तर प्रदेश के विकास का नया 'माइलस्टोन', पर्यटन अर्थव्यवस्था में 16 प्रतिशत की बढ़ोतरी का लक्ष्य
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश वैश्विक आध्यात्मिक राजधानी बन रहा है। बौद्ध सर्किट, जिसमें सारनाथ, कुशीनगर जैसे स्थल शामिल हैं, पर्यटन और निवेश का प्रमुख केंद्र बन गया है। हाल ही में कुशीनगर में हुए इंटरनेशनल बौद्ध कॉन्क्लेव-2026 में 3000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले। इसका लक्ष्य 2047 तक पर्यटन GVA में यूपी का योगदान 9.2% से बढ़ाकर 16% करना है, जिससे अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
- यूपी बौद्ध सर्किट वैश्विक आध्यात्मिक राजधानी के रूप में उभर रहा है।
- कुशीनगर कॉन्क्लेव में 3000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले।
- 2047 तक पर्यटन GVA में 16% योगदान का लक्ष्य निर्धारित।
पनी नई पहचान गढ़ रहा है। इसी आकांक्षा को धरातल पर उतारने के लिए प्रदेश का 'बौद्ध सर्किट' एक महत्वपूर्ण इंजन साबित हो रहा है।
ब केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक पर्यटन, सांस्कृतिक कूटनीति और निवेश का एक शक्तिशाली केंद्र बनकर उभरा है। हाल ही में कुशीनगर में संपन्न हुए इंटरनेशनल बौद्ध कॉन्क्लेव-2026 ने इस सर्किट पर वैश्विक निवेश के नए द्वार खोल दिए हैं।
र्थव्यवस्था का मजबूत सफर
वसर पैदा हो रहे हैं।
कुशीनगर कॉन्क्लेव: 3000 करोड़ का निवेश प्रस्ताव
ब विकास की उर्वर भूमि बन चुका है।
विकसित उत्तर प्रदेश@2047 का रोडमैप
पर्यटन विभाग के ‘विकसित उत्तर प्रदेश@2047’ विजन में बौद्ध सर्किट की भूमिका निर्णायक होगी। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि पर्यटन आधारित सकल मूल्य वर्धन (GVA) में यूपी का योगदान वर्तमान 9.2 प्रतिशत से बढ़ाकर 2047 तक 16 प्रतिशत किया जाए। इसके साथ ही, प्रदेश में यूनेस्को मान्यता प्राप्त विरासत स्थलों की संख्या को 7 से बढ़ाकर 20 करने की महत्वाकांक्षी योजना पर काम चल रहा है।
ग्रसर यूपी
ब हकीकत में बदल रहा है।
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